समाज | बड़ा आर्टिकल
इंटरनेट आज के विद्यार्थी की जरूरत, लेकिन वहां भी जलवा इंटरटेनमेंट मीडिया का है!
इंटरनेट दुनिया के हर कोने में उपयोगी जानकारियां उपलब्ध कराने की क्रांतिकारी तकनीक है. इसके जरिए लोग किसी भी जानकारी को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. उसका आदान-प्रदान कर सकते हैं. यह भी जानना होगा क्यों इंटरनेट का दुरुपयोग हो रहा.
सियासत | 5-मिनट में पढ़ें
मोदी सरकार के 9 साल: आर्थिक विकास की लंबी छलांग के बाद भी कुछ बड़ी चुनौतियां
भारत के आधे लोग इस साल के अंत तक 30 वर्ष से कम आयु के होंगे. जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए हमे दीर्घकालिक निवेश की जरुरत है जो महिलाओं और युवाओं के बीच उच्च बेरोजगारी का समाधान करे. भारत बड़े बदलाव के मुहाने पर है. वैश्विक अनिश्चितताओं के इस अशांत समय में पूरी दुनिया भारत की ओर बड़ी उम्मीद से देख रही है.
सियासत | 4-मिनट में पढ़ें
प्रधानमंत्री मोदी ने तकनीक को बनाया सशक्तिकरण का माध्यम...
भारत ने तकनीक के माध्यम से समाजार्थिक असमानताओं को भी दूर करने में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. आज हमारे डिजिटल सेवाओं के प्रसार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार के क्षेत्र में नये अवसरों का सृजन करने के साथ ही, सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाने का भी कार्य किया है.
सियासत | 4-मिनट में पढ़ें
साल 2022: भारत के लिए कई मायनों में रहा ऐतिहासिक
भारत ने गत वर्ष भी संयुक्त राष्ट्र संघ की अध्यक्षता संभाली थी और इस वर्ष हिन्दी को संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकृति दिलाते हुए, वैश्विक पटल पर अपनी बढ़ती ताकत का परिचय दिया है. आज हमने वर्ष 2047 तक, खुद को एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए ‘पंच प्रण’ का संकल्प लिया है. हमारे ये प्रण गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, एकजुटता, विरासत पर गर्व और अपने कर्तव्यों का निर्वहन हैं.
ह्यूमर | 4-मिनट में पढ़ें
शादियों में शगुन का लिफाफा डिजिटल हुआ है और यकीनन ये एक क्रांतिकारी कदम है!
बिहार के गोपालगंज में शगुन का लिफाफा डिजिटल हुआ है. यानी शादी/मुंडन/बर्थ डे में आइये, खाइये, पीजिये, मोबाइल से स्कैन कीजिये और चले जाइये. यक़ीनन शगुन के लिफाफों में फूफा, मौसा की मोनोपॉली को ख़त्म करने की दिशा में ये ट्रेडिशन एक क्रांतिकारी कदम है.
टेक्नोलॉजी | 4-मिनट में पढ़ें
इकोनॉमी | 4-मिनट में पढ़ें
तो क्या अब क्रिप्टो करंसी का टाइम आ गया है?
दक्षिण अमेरिका के छोटे से देश एल साल्वाडोर ने डिजिटल करंसी बिट कॉइन को कानूनी मान्यता देकर पहला कदम बढ़ा दिया है. एल साल्वाडोर जिसकी अपनी कोई करंसी नहीं है, जहां अमेरिकी डॉलर का चलन है, वहां का ये फैसला सीधे तौर पर भारत जैसे देशों को प्रभावित भले ना करे, लेकिन इतना तय है कि इससे कोई देश अछूता नहीं रह सकता.
समाज | 4-मिनट में पढ़ें
हर चीज सोशल मीडिया पर शेयर करने वालों को प्राइवेसी की इतनी चिंता कहां है?
भारत में लोगों को 'मुफ्त यानी फ्री' की चीजें बहुत पसंद आती हैं. फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, वॉट्सएप, जीमेल जैसी दर्जनों एप हैं, जो 'फ्री' हैं. लेकिन, ये केवल नाम की ही फ्री हैं. अगर कोई प्ले स्टोर से लूडो जैसे गेम का एप भी डाउनलोड कर इंसटॉल करता है, तो उसे दस तरह की परमीशन देनी पड़ती हैं.
समाज | 4-मिनट में पढ़ें





